जेजेए ने धनबाद प्रेस क्लब की मनमानी पर अंकुश लगाया, मुख्यमंत्री का ऑनलाइन उद्घाटन कार्यक्रम हुआ स्थगित
संवाददाता
धनबाद। आज झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन की ओर से धनबाद प्रेस क्लब की वर्तमान कमेटी की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए धनबाद के पत्रकारों ने उपायुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा। इससे पहले संगठन के संस्थापक शाहनवाज़ हसन ने
उपायुक्त धनबाद से दूरभाष पर संपर्क कर उन्हें पूरी जानकारी दी। जेजेए के कार्यकारी अध्यक्ष अमरकांत ने झारखंड के मुख्य सचिव को शुक्रवार को ही संगठन की ओर से वर्तमान कमेटी की मनमानी से अवगत कराया था। जेजेए की आपत्ति के उपरांत आज धनबाद प्रेस क्लब के भवन का उद्घाटन मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्धारा ऑनलाइन स्थगित कर दिया गया। जेजेए के इस प्रयास से आंचलिक पत्रकारों ने संगठन का आभार व्यक्त किया है।
जेजेए ने पत्र लिखकर झारखंड सरकार के द्वारा धनबाद जिला में निर्मित प्रेस क्लब के भवन को “धनबाद प्रेस क्लब” नामक ट्रस्ट को हस्तांतरित किए जाने पर आपत्ति जताई।
प्रेस क्लब धनबाद के वर्तमान पदाधिकारी पत्रकारों को सदस्यता देने के नाम पर अपनी मनमानी करते आ रहे हैं। लगभग 150 से अधिक पत्रकारों को यह कहते हुए सदस्यता नहीं दी गई है कि वे किसी अन्य पत्रकार यूनियन के सदस्य हैं।
उपायुक्त को लिखे पत्र में कहा गया है कि प्रेस क्लब और यूनियन के कार्यक्षेत्र अलग अलग होते हैं इस बात से धनबाद प्रेस क्लब के वर्तमान पदाधिकारी अनभिज्ञ हैं। देश के किसी भी प्रेस क्लब का कोई भी पदाधिकारी अथवा सदस्य भारत सरकार द्धारा पत्रकारों के लिए बनाए गए सर्वोच्च संस्था “प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया” का सदस्य नहीं हो सकता है।प्रेस काउंसिल की सदस्या यूनियन द्धारा नामित पत्रकारों को दी जाती है। किसी पत्रकार को प्रेस क्लब की सदस्यता देने से कोई प्रेस क्लब रोकता है तो यह असंवैधानिक है।
अतः आप से आग्रह है कि इस मामले में नियम विरुद्ध किए जा रहे कार्य पर तत्काल अंकुश लगाते हुए धनबाद प्रेस क्लब का चुनाव “रांची प्रेस क्लब” के तर्ज पर दंडाधिकारी की नियुक्ती कर करवाया जाए। धनबाद जिला के सभी पत्रकारों को सदस्यता के उपरांत ही निर्वाचन की प्रक्रिया शुरू की जाए। जबतक नई विधिवत निर्वाचित कमेटी का गठन नहीं हो जाता तब तक एक एड-हॉक कमेटी को क्लब की ज़िम्मेदारी सौंप कर झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों समेत धनबाद ज़िले के सभी पत्रकार को क्लब की सदस्यता दिलवाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।

निश्चित ही पत्रकार इसके हकदार हैं ,इनकी मांग मेरे विचार से जायज है ।ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकार ज्यादा पीड़ित होते हैं ,इन्हें सुरक्षा की ज्यादा जरूरत है