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महापर्व छठ की शुरुआत किसने की

धनवार के राजघाट में ऐसा दिखेगा दृश्य

पी के बरनवाल राजधनवार
    महापर्व छठ का त्योहार आते ही एक सबों के दिल दिमाग में धनवार के राजघाट का जीवंत दृश्य सामने आ ही जाता है जो स्थानीय लोगों के भरपूर सहयोग से लगातार नए नए व आकर्षक साज सज्जा के साथ मनाया जाता है । बीते वर्षों से लगातार यहां पर की जाने वाली सजावट को देखने एवं त्योहार को मनाने के लिए सिर्फ झारखंड ही नहीं अपितु देश के हर कोने से लोग त्योहार मनाने आते हैं तथा छठी मैया उनकी मनोकामना पूर्ण करती हैं ।

तत्कालीन महाराज ने पूजा शुरुआत की थी पूजा
धनवार का राजघाट जो झारखंड के गिरिडीह जिला के धनवार प्रखंड में स्थित है (अभी नगर पंचायत धनवार) जहां बीते लगभग तीन सौ से अधिक वर्षों से अनवरत महापर्व छठ मनाया जा रहा है ।

अखिलेश्वर नारायण देव (तत्कालीन राजा माहेश्वरी नारायण देव के वंशज)

इस बाबत तत्कालीन महाराज माहेश्वरी नारायण देव के वंशज अखिलेश्वर नारायण देव ने बताया कि लगभग 1700 इश्वी में मोद नारायण देव बिहार राज्य के नवादा जिला अंतर्गत पकरीबर्मा प्रखंड स्थित सिउर ग्राम जो संकरी नदी के बगल स्थित है से धनवार आए थे । सौ कोस तक उनका अधिपत्य था । उन्होंने उस वक्त इसी नदी पर महापर्व छठ पूजा प्रारंभ किया था , उसके बाद खेम बहादुर नारायण देव , गिरिवर नारायण देव , रणबहादुर नारायण देव , ईश्वरी प्रसाद नारायण देव तथा इस क्षेत्र के अंतिम महाराजा माहेश्वरी नारायण देव मां छठी मैया एवं भगवान सूर्य देव की पूजा अनवरत इस घाट पर जारी रखा । कहा कि यहां की चर्चा देश विदेश में भी होने लगी है जो हम सबों को गौरवान्वित करने वाला है ।

मनोकामना होती है पूरी

राज घाट में महापर्व छठ के त्योहार मनाने वालों की मान्यता है कि जो भी दुःख हो यदि सच्चे दिल एवं स्वच्छता के साथ छठी मैया की आराधना की जाती है तो यहां पर उनकी मनोकमाना पूर्ण होती है । इस बाबत धनवार निवासी सह समाजसेवी नंदलाल साव बताते हैं कि यहां पूजा अर्चना करने वाले सभी भक्तों की मनोकामना  पूर्ण होती है । जैसा भी दुख हो सभी दुख छठी मैया दूर कर देती हैं ।

लगातार बढ़ छठ व्रतियों की संख्या
शुरुआत में बहुत कम लोग ही राजधनवार के राज घाट पर पूजा अर्चना करने लोग आते थे परंतु अभी सैकड़ों की संख्या में डालिया लेकर पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं । इस बाबत स्थानीय निवासी सह समाजसेवी मुन्ना साव बताते हैं कि जैसे जैसे भक्तों की मनोकामना को पूरी हो रही है वैसे वैसे यहां त्योहार मनाने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है । पहले यहां बहुत कम लोग डालिया लेकर आते थे परंतु आज हजारों की संख्या में लोग यहां अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर या मनोकामना पूर्ण करने के लिए आने लगे हैं ।

इस बार क्या है लोगों के आकर्षण का केंद्र
  इस बाबत समिति सचिव रोबिन साव ने बताया कि इस बार धनवार के राज घाट पर भक्ति के साथ साथ लोगों के अंदर विज्ञान के बदौलत पूरे विश्व में देश के प्रभुत्व को स्थापित करने वाले चंद्रयान 3 की प्रतिमूर्ति तैयार की जा रही है । जहां लोग भक्ति के साथ साथ देश भक्ति के सागर में भी गोता लगाने को विवश हो जाएंगे । वहां पर मौजूद एलियन उन्हें अलग दुनियां में होने का एहसास कराते नजर आएंगे ।

बंगाल एवं रांची से आए हैं कारीगर

महापर्व छठ पूजा महासमिति अध्यक्ष जयप्रकाश गुप्ता ने बताया कि इस बार यहां साउथ में स्थापित भगवान सूर्य मंदिर का प्रतिरूप बनाया जा रहा है जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित तो करेगा ही घाट पर बनाया जा रहा हंस पुल लोगों को ठिठकने को विवश कर देगा । बताया कि यहां की विद्युत साज सज्जा इस बार अन्य वर्षों से अलग एवं अदभुत होगा ।यहां की सजावट को मंत्रमुग्ध करने जैसा बनाने के लिए बंगाल से अशोक जी , अजय जी , समीर चक्रवर्ती , मूर्तिकार कार्तिक दास समेत दर्जनों लोग जुट गए हैं ।


समाजसेवी सह व्यवसाई पंकज बरनवाल बताते हैं महापर्व छठ के त्योहार को शांति पूर्ण तरीके से मनाने के लिए समिति को कई भागों में विभक्त कर सबों को अलग अलग प्रभार सौपा गया है जिसके लिए सभी लोग पूरी तनमान्यता से जुटे हुए हैं । स्थानीय लोगों का भी भरपूर सहयोग भी मिल रहा है । बताया कि दुर्गा पूजा के उपरांत महापर्व छठ को लेकर तैयारियां शुरू की जा चुकी है ।
  जानकारों की माने तो राजधनवार राज घाट पर लगने वाले इस विशाल मेला के लिए युवा व्यवसाई सह समाजसेवी अनूप संथालिया का महत्वपूर्ण योगदान रहता है । उनके एवं समिति के वरिष्ठ लोगों के मार्गदर्शन में बनी टीम के सदस्य अपने कर्तव्यों का अक्षरशः पालन करने को कटिबद्ध रहते हैं ।

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