राजधनवार छठ – लंका विजय, वंदे भारत की झलक
पूरे हर्षोल्लास के साथ धनवार में मनाया जाता है महापर्व छठ – राजधनवार छठ
रिपोर्ट: प्रेमजीत कुमार बर्णवाल
Rajdhanwar Chhath
जब भी छठ महापर्व की बात होती है, झारखंड के गिरिडीह जिले के धनवार में स्थित राजघाट का दृश्य लोगों के मन में जीवंत हो उठता है। इस घाट की विशेष पहचान इसकी अद्वितीय सजावट है, जिसे स्थानीय व्यापारियों और निवासियों के सहयोग से हर वर्ष भव्य रूप से संवारा जाता है। इस विशेष साज-सज्जा ने न केवल झारखंड में बल्कि पूरे देश में एक नया मानक स्थापित किया है।
राजघाट की इस सुंदर सजावट को देखने और छठ का पर्व मनाने के लिए झारखंड के अलावा देश के कोने-कोने से लोग यहां आते हैं। वे यहां के खुशनुमा दृश्य और अद्वितीय माहौल को अपनी यादों में समेट कर ले जाते हैं। आज राजघाट पर मनाए जाने वाले इस महापर्व की ख्याति देश-विदेश तक पहुंच चुकी है. यह इस क्षेत्र के लोगों के लिए गर्व का विषय है।
ऐतिहासिक है महाछठ पर्व का आयोजन
नगर पंचायत धनवार स्थित राजघाट पर छठ महापर्व मनाने की परंपरा लगभग तीन सौ वर्षों से चली आ रही है। इस ऐतिहासिक परंपरा के बारे में आदर्श कॉलेज राजधनवार के सेवानिवृत्त शिक्षक और धनवार के तत्कालीन महाराज माहेश्वरी नारायण देव के वंशज, अखिलेश्वर नारायण देव बताते हैं कि यह परंपरा करीब 1700 ईस्वी में शुरू हुई थी।
उनके अनुसार, उस समय मोद नारायण देव, जो बिहार के नवादा जिले के पकरीबरमा प्रखंड के सिउर गाँव से धनवार आए थे. उन्होंने इस स्थान पर छठ पूजा शुरू की थी। उस समय उनके साम्राज्य का विस्तार सौ कोस तक फैला हुआ था। उनके बाद उनके उत्तराधिकारी—खेम बहादुर नारायण देव, गिरिवर नारायण देव, रणबहादुर नारायण देव, ईश्वरी प्रसाद नारायण देव, और माहेश्वरी नारायण देव—ने भी इस परंपरा को बनाए रखा और इसे आगे बढ़ाया।
Rajdhanwar Chhath
गहरी आस्था का केंद्र है महापर्व छठ का राजघाट
महापर्व छठ में राजघाट पर पूजा करने वाले श्रद्धालुओं का गहरा विश्वास है कि यदि सच्चे मन और स्वच्छता के साथ छठी मैया की आराधना की जाए, तो उनकी सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। धनवार के निवासी और समाजसेवी, जैसे नंदलाल साव, पंकज बरनवाल, अनिल कुमार और कई अन्य श्रद्धालु बताते हैं कि यहाँ पूजा करने से भक्तों के सभी दुःख दूर हो जाते हैं, और छठी मैया उनकी हर इच्छा को पूरा करती हैं।
शुरुआत में राजघाट पर बहुत कम लोग छठ पूजा के लिए आते थे। लेकिन समय के साथ, जैसे-जैसे लोगों की मनोकामनाएँ पूरी होती गईं, यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी। अब हर साल सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएँ लेकर यहाँ आते हैं। समाजसेवी मुन्ना साव का कहना है कि जैसे-जैसे लोगों का विश्वास बढ़ता गया, राजघाट पर आने वाले भक्तों की संख्या में लगातार वृद्धि होती गई है।
लंका विजय की झलक, वंदे भारत हैं आकर्षण का केंद्र
समिति के अध्यक्ष जयप्रकाश गुप्ता ने बताया कि इस बार धनवार के राजघाट पर छठ महापर्व की सजावट विशेष होगी। यहाँ मुख्य द्वार राम मंदिर की तर्ज पर बनाया जा रहा है, और आकर्षक लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है।
चैती दुर्गा माता के परिसर में राम के वनवास से लेकर लंका विजय तक की विभिन्न कलाकृतियाँ प्रदर्शित की जा रही हैं। आगे पुल के पास दुर्गा माता के नौ स्वरूपों की प्रतिमाएँ बनाई जा रही हैं, और पुल को “वंदे भारत” ट्रेन के मॉडल की तरह सजाया गया है, जो लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
भगवान सूर्य का मंदिर भी यहाँ आने वाले लोगों को खासा आकर्षित कर रहा है। जयप्रकाश गुप्ता ने कहा कि इस बार की विद्युत सजावट पिछले वर्षों से बिल्कुल अलग और अद्भुत होगी। इसके लिए बंगाल से आए कारीगर सजावट को और विशेष बनाने में जुटे हैं। इसके अलावा, अन्य कलाकृतियाँ भी यहाँ के माहौल में उत्सव का रंग भर देंगी।
Rajdhanwar Chhath
योजनाबद्ध होती है तैयारी
महापर्व छठ के शांतिपूर्ण और सफल आयोजन के लिए पूजा समिति ने अपने कार्यों को कई भागों में बाँट दिया है। समिति के महासचिव और समाजसेवी रोबिन साव बताते हैं कि सभी सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं, और स्थानीय निवासियों का भी इसमें भरपूर सहयोग मिल रहा है। दुर्गा पूजा के समाप्त होते ही छठ की तैयारियाँ शुरू कर दी जाती हैं।
समिति के उपाध्यक्ष सुमन वर्मा के अनुसार, राजघाट पर लगने वाले इस विशाल मेले के आयोजन में युवा व्यवसायी और समाजसेवी अनूप संथालिया अपनी टीम के साथ पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं। प्रशासन से भी समिति को इस आयोजन के लिए अच्छा सहयोग मिल रहा है।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अनूप संथालिया, जयप्रकाश गुप्ता, रोबिन साव, पंकज बरनवाल, बालेश्वर मोदी, दयानंद साहू, सुधीर अग्रवाल, सुमन वर्मा, अशोक साव, मुन्ना साव, अनमोल कुमार और राहुल कुमार सहित कई अन्य समिति के सदस्य पूरी लगन से कार्यरत हैं।
इसके अलावा, राजघाट के उत्तर में स्थित दीवान टोला घाट पर भी आकर्षक सजावट की जा रही है। यहाँ बन रहा विशाल मोर और अन्य साज-सज्जा श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करेगी और उन्हें रुकने के लिए प्रेरित करेगी। दीवान टोला घाट में दीपक सोनी, सुनील पंडित, महेंद्र स्वर्णकार, शंकर स्वर्णकार, शंभू रजक, और कृष्णा स्वर्णकार जैसे सदस्य पूरी मेहनत से इस आयोजन को भव्य बनाने में जुटे हैं।

राजधनवार में छठ पूजा त्योहार को व्यवस्थित ढंग से इस विशाल आयोजन से मैं भागीरथ कुशवाहा नावाडीह मरकच्चो खाशा उत्साहित हैं। मुझे इस आयोजन का दीदार करने का सौभाग्य नहीं मिल पाता है क्योंकि वर्तमान में मैं कोलकाता में रहता हूं। दूर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि छठ पूजा में छूट्टी रहने के बावजूद घर नहीं आ पाता हूं। फिर भी राजधनवार में छठ पूजा समिति के द्वारा इस विशाल आयोजन का मैं स्वागत करते हैं।जय छठ मैय्या 🙏🙏🙏🙏🙏