विहंगम योग से चेतना का होता है विकास: पारसनाथ
धनवार में हवन-यज्ञ कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक मार्गदर्शन
धनवार (गिरिडीह)। आत्मा और परमात्मा के मिलन का मार्ग विहंगम योग मानव जीवन को एक नई दिशा प्रदान करता है। यह कहना है विहंगम योग के विद्यार्थी पारसनाथ का, जो सोमवार को धनवार नगर पंचायत क्षेत्र स्थित शिवचरण बरनवाल के आवास पर आयोजित हवन-यज्ञ कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
पारसनाथ ने कहा कि “आत्मा चेतन है, परमात्मा भी चेतन है। जब आत्मा परमात्मा से जुड़ती है, तो उसे विहंगम योग कहते हैं। यह एक ऐसा दिव्य मार्ग है, जिससे जीव अपने भीतर के अज्ञान और अंधकार से मुक्त होता है तथा आवागमन के चक्र से बाहर निकल जाता है।”
उन्होंने बताया कि विहंगम योग की साधना से न केवल आत्मिक बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक विकास भी होता है। इस योग से मनुष्य की चेतना विकसित होती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
कार्यक्रम का वातावरण रहा आध्यात्मिक
हवन-यज्ञ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। सभी ने विधिपूर्वक आहुतियां दीं और आध्यात्मिक प्रवचनों का लाभ उठाया। कार्यक्रम के आयोजक शिवचरण बरनवाल ने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
श्रद्धालुओं ने पारसनाथ के विचारों की सराहना की और विहंगम योग के अभ्यास को जीवन में अपनाने की प्रेरणा ली।
