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फाइलेरिया विलोपन के लिए रात्रि रक्त पट्ट संग्रह अभियान, भल्लुटांड में 300 लोगों का ब्लड सैंपल लिया गया

राजधनवार (झारखंड), 19 दिसंबर 2024 — फाइलेरिया उन्मूलन के तहत भल्लुटांड गांव में बुधवार देर रात रात्रि रक्त पट्ट संग्रह कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस अभियान का उद्घाटन भल्लुटांड पंचायत के मुखिया शंकर पासवान और रेफरल अस्पताल राजधनवार के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कुमार इन्दु शेखर ने संयुक्त रूप से किया।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फाइलेरिया की प्रारंभिक पहचान के लिए रक्त के नमूने एकत्र करना था, ताकि इस गंभीर बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सके। अभियान के दौरान कुल 300 ग्रामीणों के रक्त सैंपल लिए गए। इस कार्य में स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ सहिया, सेविका और स्वास्थ्य कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

घर-घर जाकर किया गया ब्लड सैंपल कलेक्शन

अभियान की सफलता के लिए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कुमार इन्दु शेखर ने स्वयं पूरी प्रक्रिया की निगरानी की। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मिलकर देर रात तक घर-घर जाकर लोगों से रक्त के नमूने एकत्र कराए। इस दौरान डॉ. शेखर ने ग्रामीणों से अपील की कि वे स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों का लाभ उठाएं और फाइलेरिया उन्मूलन में अपना सहयोग दें। उन्होंने कहा, “फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है, जिसके उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। समय रहते जांच और उपचार कराने से इस बीमारी से बचा जा सकता है।”

कार्यक्रम में जुटी विशेषज्ञों की टीम

इस अभियान को सफल बनाने में स्वास्थ्य विभाग की कई प्रमुख टीमों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी रही। इस मौके पर मलेरिया टेक्निकल सुपरवाइजर अजय कुमार वर्मा, लैब टेक्नीशियन प्रवीण कुमार, राजकुमार पासवान, एमपीडब्ल्यू (मल्टी पर्पस वर्कर) विनोद कुमार विश्वकर्मा, मनोज कुमार शर्मा, बबलू कुमार साहू, बबलू राउत, चन्दन कुमार सिन्हा और कपिल देव सिंह सहित कई अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे।

ग्रामीणों ने अभियान का किया स्वागत

भल्लुटांड गांव के ग्रामीणों ने इस अभियान का स्वागत किया और स्वास्थ्यकर्मियों का सहयोग किया। ग्रामीणों का कहना था कि ऐसे अभियानों से उन्हें बीमारी के प्रति जागरूक होने और समय पर जांच का अवसर मिलता है। सहिया और सेविका ने भी इस अभियान में अपनी अहम भूमिका निभाई।

फाइलेरिया क्या है?

फाइलेरिया एक प्रकार का परजीवी संक्रमण है, जो मच्छरों के काटने से फैलता है। यह बीमारी लिम्फ तंत्र को प्रभावित करती है, जिसके कारण हाथ, पैर और अन्य अंगों में सूजन आ जाती है। इसे हाथीपांव के नाम से भी जाना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2030 तक फाइलेरिया के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में सरकार और स्वास्थ्य विभाग कई जागरूकता और जांच अभियान चला रहे हैं।

निष्कर्ष

भल्लुटांड गांव में आयोजित रात्रि रक्त पट्ट संग्रह अभियान ने फाइलेरिया उन्मूलन के प्रयासों को और मजबूती प्रदान की है। ग्रामीणों और स्वास्थ्यकर्मियों की सामूहिक भागीदारी ने इस कार्यक्रम को सफल बनाया। डॉक्टर कुमार इन्दु शेखर के नेतृत्व में चलाया गया यह अभियान भविष्य में भी लोगों को फाइलेरिया से बचाने में मददगार साबित होगा।

रिपोर्ट: पी के बरनवाल
स्थान: राजधनवार, गिरिडीह, झारखंड

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